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हेपेटाइटिस और पीलिया दोनों बीमारियां लिवर को करती हैं पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤, लेकिन दोनों में ये हैं अंतर
हेपेटाइटिस और पीलिया (Hepatitis and jaundice) दोनों बीमारियां लिवर को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करती हैं साथ ही इनके कà¥à¤› लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में समानता होने के कारण कई बार लोग दोनों बीमारियों में कंफà¥à¤¯à¥‚ज हो जाते हैं। जबकि दोनों à¤à¤• दूसरे पूरी तरह अलग हैं। à¤à¤• तरफ हेपेटाइटिस वायरस, बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾, पैरासाइट आदि के कारण लिवर पर होने वाला इंफà¥à¤²à¤¾à¤®à¥‡à¤¶à¤¨ या इंफेकà¥à¤¶à¤¨ है। वहीं पीलिया बà¥à¤²à¤¡ में बाइल पिगमेंट (Bile Pigment) खासकर बिलिरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ (Bilirubin) की मातà¥à¤°à¤¾ बढ़ने के कारण होता है।
दोनों ही बीमारियों का इलाज संà¤à¤µ है, लेकिन हेपेटाइटिस (Hepatitis) कई बार यह लिवर सिरोसिस (Liver cirrhosis) और फाइबà¥à¤°à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ (Fibrosis) का कारण बन सकता है। जिससे मरीज की मौत तक हो सकती है। वहीं कई बार पीलिया बिगड़ने पर जानलेवा हो जाता है। ये दोनों ही कंडिशन लिवर को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करती हैं। इस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल में हेपेटाइटिस और पीलिया (Hepatitis and jaundice) के बारे में जानने के साथ ही जानिठदोनों में कà¥à¤¯à¤¾ अंतर है।
हेपेटाइटिस और पीलिया
हेपेटाइटिस à¤à¤• लिवर डिजीज (Liver Disease) है। वहीं पीलिया बà¥à¤²à¤¡ में यलो पिगमेंट बिलिरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ (Yellow Pigment bilirubin) के बढ़ने का संकेत है। हेपेटाइटिस और पीलिया (Hepatitis and jaundice) लिवर की दो अलग-अलग कंडिशन हैं जिनके कारण à¤à¥€ अलग हैं। लिवर का काम डायजेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤µ सिसà¥à¤Ÿà¤® से आने वाले बà¥à¤²à¤¡ को पà¥à¤¯à¥‚रिफाय करना, बाइल का सीकà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ करना (Secretion of bile), कैमिकलà¥à¤¸ का डिटॉकà¥à¤¸à¤¿à¤«à¤¿à¤•ेशन करना (Detoxification of chemicals), डà¥à¤°à¤— का मेटाबॉलाइजेशन (Metabolization of drugs) और पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ का पà¥à¤°à¥‹à¤¡à¤•à¥à¤¶à¤¨ करना है।
हालांकि कई हेपेटाइटिस के मरीज बाद में पीलिया से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो सकते हैं, लेकिन पीलिया का सामना कर रहे मरीजों को हेपेटाइटिस होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ नहीं होती। हेपेटाइटिस और पीलिया दोनों कंडिशन का समय पर इलाज जरूरी है।
हेपेटाइटिस (Hepatitis)
हेपेटाइटिस और पीलिया में से सबसे पहले जान लेते हैं हेपेटाइटिस के बारे में। हेपेटाइटिस वायरस हेपेटाइटिस का सबसे आम कारण है। वहीं दूसरे कारणों में ऑटोइमà¥à¤¯à¥‚न डिजीज (Autoimmune disease), इंफेकà¥à¤¶à¤¨, à¤à¤²à¥à¤•ोहॉल का उपयोग और दवाà¤à¤‚ हो सकती हैं। हेपेटाइटिस के पांच पà¥à¤°à¤•ार हैं। जो निमà¥à¤¨ हैं।
हेपेटाइटिस ठ(Hepatitis A)
हेपेटाइटिस ठदूषित खाना या पानी के कारण होता है। इस दौरान मरीज à¤à¥‚ख की कमी, à¤à¤¬à¥à¤¡à¥‹à¤®à¤¿à¤¨à¤² पेन, जी मिचलाना, लूज सà¥à¤Ÿà¥‚ल, डारà¥à¤• कलर यूरिन और पीलिया से पीड़ित होता है। इस बीमारी का कोई सà¥à¤ªà¥‡à¤¸à¤¿à¤«à¤¿à¤• इलाज नहीं है यह अपने आप ही ठीक हो जाता है। इससे बचने के लिठवà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को फूड और वाटर सपà¥à¤²à¤¾à¤ˆ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ जागरूक होना चाहिà¤à¥¤
हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B)
हेपेटाइटिस बी होने पर वयकà¥à¤¤à¤¿ पीलिया की तरह लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ का अनà¥à¤à¤µ करता है जिसमें उलà¥à¤Ÿà¥€, à¤à¤¬à¥à¤¡à¥‹à¤®à¤¿à¤¨à¤² पेन, डारà¥à¤• यूरिन, थकावट आदि शामिल हैं। यह हेपेटाइटिस सेकà¥à¤¶à¥à¤…ल टà¥à¤°à¤¾à¤‚समिशन और बà¥à¤²à¤¡ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ होता है।
हेपेटाइटिस सी (Hepatitis C)
हेपेटाइटिस सी के लकà¥à¤·à¤£ बी और ठकी तरह ही होते हैं। यह इंफेकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¡ बà¥à¤²à¤¡ के सीधे संपरà¥à¤• में आने से होता है।
हेपेटाइटिस डी (Hepatitis D)
हेपेटाइटिस बी का सामना कर रहे लोगों में हेपेटाइटिस डी होने की आशंका काफी जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है। हेपेटाइटिस डी इंफेकà¥à¤¶à¤¨ को सà¥à¤ªà¤°à¤‡à¤‚फेकà¥à¤¶à¤¨ à¤à¥€ कहा जाता है। आमतौर पर हेपेटाइटिस बी की वैकà¥à¤¸à¥€à¤¨ दी जाती है जो हेपेटाइटिस डी वायरस से पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करती है।
हेपेटाइटिस ई (Hepatitis E)
हेपेटाइटिस ई का मà¥à¤–à¥à¤¯ कारण दूषित पानी का उपयोग है। इसके साथ ही यह पानी की कमी से à¤à¥€ होता है। इसलिठहायडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ इसका आवशà¥à¤¯à¤• टà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट है। हेपेटाइटिस के बारे में जानने के बाद पीलिया को à¤à¥€ विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से जान लेते हैं।
पीलिया (Jaundice)
हेपेटाइटिस और पीलिया की बात करें तो, पीलिया à¤à¤• बार-बार और सामानà¥à¤¯ तौर पर होने वाली मेडिकल कंडिशन। यह आमतौर पर नवजात शिशॠऔर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में होती है लेकिन कई बार वà¥à¤¯à¤¸à¥à¤• à¤à¥€ इससे पीड़ित होते हैं। पीलिया होने पर आंखें, तà¥à¤µà¤šà¤¾ और पेशाब पीला आता है। à¤à¤¸à¤¾ बà¥à¤²à¤¡ में बिलिरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ के बढ़ने से होता है। इस कंडिशन को हायपरबिलिरà¥à¤¬à¤¿à¤¨à¥‡à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ (Hyperbilirubinemia) à¤à¥€ कहते हैं। अनà¥à¤¯ अपशिषà¥à¤Ÿ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ की तरह जो पेशाब के माधà¥à¤¯à¤® से बाहर निकल जाते हैं, बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ à¤à¥€ हीमोगà¥à¤²à¥‹à¤¬à¤¿à¤¨ के कà¥à¤·à¤°à¤£ (Degradation) का अपशिषà¥à¤Ÿ पदारà¥à¤¥ है, लेकिन पानी में अघà¥à¤²à¤¨à¤¶à¥€à¤² होने के कारण बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ पेशाब के जरिठबाहर नहीं निकल पाता है।
à¤à¤¸à¥‡ में लिवर कà¥à¤› रसायनों के संयोजन से बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ को संयà¥à¤—à¥à¤®à¤¿à¤¤-पानी में घà¥à¤²à¤¨à¤¶à¥€à¤² सामगà¥à¤°à¥€ में परिवरà¥à¤¤à¤¿à¤¤ करने में कारà¥à¤¯ करता है। यह संयà¥à¤—à¥à¤®à¤¿à¤¤-पानी में घà¥à¤²à¤¨à¤¶à¥€à¤² पदारà¥à¤¥ तब पितà¥à¤¤ नली (बाइल डकà¥à¤Ÿ) दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पेशाब और मल में सà¥à¤°à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होता है। यह बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ मल को पीला रंग देने के लिठजिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° है।
हालांकि, हेमोलिसिस (Hemolysis) और अनà¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के कारण जब लिवर और पितà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ (Biliary system) में डीगà¥à¤°à¥‡à¤¡à¥‡à¤¡ (Degraded) लाल रकà¥à¤¤ कोशिकाओं की संखà¥à¤¯à¤¾ बढ़ जाती है, तो अंततः रकà¥à¤¤ में बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ (Bilirubin) के सà¥à¤¤à¤° में वृदà¥à¤§à¤¿ होती है।
पीलिया के पà¥à¤°à¤•ार (Types of Jaundice)
पैथोलॉजिकल कंडिशनà¥à¤¸ के आधार पर पीलिया के सामानà¥à¤¯ तौर पर निमà¥à¤¨ तीन पà¥à¤°à¤•ार होते हैं।
हेपाटोसेलà¥à¤²à¤° जोइंडिस (Hepatocellular jaundice) यह लिवर डिजीज के कारण होता है
ऑबà¥à¤¸à¤Ÿà¥à¤°à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ जोइंडिस (Obstructive jaundice) यह असामानà¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤“ं के कारण या सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨à¥à¤¸ के कारण होने वाले बिलेरी टà¥à¤°à¥‡à¤•à¥à¤Ÿ के ऑबà¥à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¤•à¥à¤¶à¤¨ के कारण होता है।
हीमोलिटिक जोइंडिस (Hemolytic jaundice) यह हेमीलिसिस के बढ़ने कारण होता है।
पीलिया के कारण (Types of Jaundice)
पीलिया के कारण निमà¥à¤¨ हैं।
हेपेटाइटिस (Hepatitis)
लिवर सिरोसिस (Liver cirrhosis)
बाइल डकà¥à¤Ÿ में असामानताà¤à¤‚ (Abnormalities in the bile duct)
गालसà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ ऑबà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤•à¥à¤¶à¤¨ (Gallstone obstructions)
पीलिया होने पर कैसे लकà¥à¤·à¤£ दिखाई देते हैं?
पीलिया के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में उलà¥à¤Ÿà¥€, बà¥à¤–ार, वजन का कम होना, à¤à¤¬à¥à¤¡à¥‹à¤®à¤¿à¤¨à¤² पेन, खà¥à¤œà¤²à¥€, यूरिन और सà¥à¤Ÿà¥‚ल के कलर में पीलापन हैं। पीलिया में आंख और नाखून à¤à¥€ पीले हो जाते हैं। पीलिया के लकà¥à¤·à¤£ दिखाई देने पर डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• करना चाहिठताकि समय रहते इसका इलाज हो सके और सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ गंà¤à¥€à¤° ना हो पाà¤à¥¤
पीलिया का पता लगाने के लिठबà¥à¤²à¤¡ टेसà¥à¤Ÿ, अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड सà¥à¤•ैन, ईआरसीपी (Endoscopic retrograde cholangiopancreatography), à¤à¤®à¤†à¤°à¤†à¤ˆ और हेपेटाइटिस ठबी और सी की जांच की जाती है। गंà¤à¥€à¤° मामलों में लिवर की बायोपà¥à¤¸à¥€ à¤à¥€ की जा सकती है। इसका इलाज à¤à¤‚टीवायरल डà¥à¤°à¤—à¥à¤¸ और सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤‡à¤¡ की मदद से किया जाता है, जो इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶ पर निरà¥à¤à¤° करता है। ऑबà¥à¤¸à¤Ÿà¥à¤°à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ पीलिया में सरà¥à¤œà¤°à¥€ की à¤à¥€ जरूरत पड़ सकती है।
हेपेटाइटिस और पीलिया में अंतर
हेपेटाइटिस और पीलिया में अंतर निमà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार हैं।
हेपेटाइटिस लिवर का इंफेकà¥à¤¶à¤¨ है। जो वायरस, बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ या पैरासाइट के कारण होता है। पीलिया बà¥à¤²à¤¡ में अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में बिलिरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ की उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के कारण होता है। बिलिरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ पीले रंग का पिगमेंट है जो बॉडी हीमोगà¥à¤²à¥‹à¤¬à¤¿à¤¨ का डिगà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ करके बनाती है। पीलिया होने पर जिसकी वजह से सà¥à¤•िन पीली होने लगती है।
हेपेटाइटिस à¤à¤• बीमारी है। जबकि पीलिया बीमारी का संकेत है।
हेपेटाइटिस हेपेटाइटिस वायरस अटैक के कारण होता है। जिससे लिवर के टिशूज डैमेज होते हैं जबकि पीलिया का कारण बà¥à¤²à¤¡ में बिलिरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ बढ़ना है। जो आंखों और सà¥à¤•िन को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है।
हेपेटाइटिस (Hepatitis) के पांच पà¥à¤°à¤•ार हैं। जिसमें à¤, बी, सी,डी और ई शामिल है। पीलिया तीन पà¥à¤°à¤•ार का होता है। जिसमें हेपाटोसेलà¥à¤²à¤° जà¥à¤µà¥‰à¤‡à¤‚डिस (Hepatocellular jaundice),ऑबà¥à¤¸à¤Ÿà¥à¤°à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ जà¥à¤µà¥‰à¤‡à¤‚डिस (Obstructive jaundice) और हीमोलिटिक जà¥à¤µà¥‰à¤‡à¤‚डिस (Hemolytic jaundice) शामिल है।
हेपेटाइटिस का निदान गामा-गà¥à¤²à¥‚टामाइल टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपेपà¥à¤Ÿà¤¿à¤¡à¥‡à¤œ (जीजीटी), बाइल à¤à¤¸à¤¿à¤¡, à¤à¤¸à¥à¤ªà¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ टà¥à¤°à¤¾à¤‚सà¤à¤®à¤¿à¤¨à¥‡à¤¸ या सीरम गà¥à¤²à¥‚टामिक ऑकà¥à¤¸à¤¾à¤²à¥‹à¤à¤¸à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤• टà¥à¤°à¤¾à¤‚सà¤à¤®à¤¿à¤¨à¥‡à¤¸ (à¤à¤¸à¤œà¥€à¤“टी), लैकà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ डिहाइडà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨à¥‡à¤œ, पà¥à¤°à¥‹à¤¥à¥à¤°à¥‹à¤®à¥à¤¬à¤¿à¤¨ टाइम, à¤à¤²à¥à¤¬à¥à¤¯à¥‚मिन, बाइल à¤à¤¸à¤¿à¤¡ के माधà¥à¤¯à¤® से किया जा सकता है।
जबकि पीलिया का निदान हेपेटिक/हेपेटोसेलà¥à¤²à¤°, पà¥à¤°à¥€-हेपेटिक/हेमोलिटिक, पोसà¥à¤Ÿ-हेपेटिक/कोलेसà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿà¤¿à¤•, फà¥à¤² बà¥à¤²à¤¡ काउंट (à¤à¤«à¤¬à¥€à¤¸à¥€), इंडोसà¥à¤•ोपिक रेटà¥à¤°à¥‹à¤—à¥à¤°à¥‡à¤¡ कोलेजियोपैंकà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ (ईआरसीपी), बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ टेसà¥à¤Ÿ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ किया जा सकता है।
हेपेटाइटिस का इलाज वायरस के पà¥à¤°à¤•ार के हमले के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° किया जाता है जिसके कारण यह होता है, जबकि पीलिया का इलाज उस पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होने पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ की मातà¥à¤°à¤¾ के आधार पर किया जाता है।
हेपेटाइटिस और पीलिया (Hepatitis and jaundice) दोनों ही लिवर से संबंधित मेडिकल कंडिशन हैं। जबकि à¤à¤• को बीमारी माना जाता है और दूसरा à¤à¤• कà¥à¤²à¥€à¤¨à¤¿à¤•ल फीचर है। ये दोनों ही केवल लिवर को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करती हैं। लिवर शरीर में रकà¥à¤¤ संचार में महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¤¾ है और कई संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ से लड़ने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ रखता है।
उमà¥à¤®à¥€à¤¦ करते हैं कि आपको हेपेटाइटिस और पीलिया (Hepatitis and jaundice) से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। साथ ही दोनों में कà¥à¤¯à¤¾ अंतर ये à¤à¥€ समठआ गया होगा। अधिक जानकारी के लिठà¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अनà¥à¤¯ कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबà¥à¤• पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सà¤à¥€ सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉकà¥à¤¸ में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिठआप ये आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल जरूर शेयर करें।
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